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दिल्ली:24 लाख बच्चो के भविष्य के साथ खिलवाड़ का जिम्मेदार कौन @NEET

दिल्ली

24 लाख बच्चो के भविष्य के साथ खिलवाड़ का जिम्मेदार कौन , सिस्टम पर मिलीभगत सवाल उठना लाजिमी ,
क्या यही है नीट जो क्लीन नही है

नीट परीक्षा में सामने आई धांधलियों के बाद पूरे देश मे नीट अभ्यर्थियों में आक्रोश देखा जा रहा है , कई राज्यो में छात्रों द्वारा नीट पेपर रद्द कर दोबारा कराये जाने की मांग के चलते प्रदर्शन किया जा रहा तो वही छात्रों पर लाठीचार्ज की भी खबर आई , आज इसी पर बात करेंगे आखिर यह बवाल क्यों उठा , क्या एंटीए का पूरा सितम इसमे पूरी तरह फेलियर रहा ,देश भर के करीब 24 लाख छात्रों ने इस परिक्षा में हिस्सा लिया था जब इसके परिणाम आये तो ऐसे अनेको छात्र थे जिनके 720 में से 720 अंक मिले , धीरे धीरे जब यह मामला खुलने लगा तो एक के बाद एक कई आश्चर्यजनक खुलासे हुए , मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंचा , इस परीक्षा करीब 1563 बच्चे ऐसे थे जिन्हें ग्रेस अंक देकर विशेष लाभ दिया गया था , कोर्ट ने उनकी दोबारा परीक्षा कराने के आदेश दिए है , बात सिर्फ इतनी नही है क्योंकि अन्य छात्रों का मानना है यह पेपर लीक हुआ है बिहार पुलिस ने इस मामले में कई लोगो को गिरफ्तार भी किया इसलिए यह परीक्षा दोबारा होनी चाहिए । आज इस पूरे घटनाक्रम पर एक नजर …

सबसे पहले आपको बताते है नीट है क्या , दरअसल साल 2017 में मानव संसाधन विकास मंत्रालय (MHRD) ने उच्च शिक्षा में प्रवेश परीक्षाओं के लिए एक एकल, स्वतंत्र, स्वायत्त निकाय स्थापित करने की घोषणा की. 1 मार्च 2018 को, राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) को औपचारिक रूप से स्थापित किया गया. इस एजेंसी का उद्देश्य विभिन्न विश्वविद्यालयों और संस्थानों में स्नातक और स्नातकोत्तर कार्यक्रमों में प्रवेश के लिए राष्ट्रीय स्तर की पात्रता परीक्षाएं (NEET, JEE Main, JEE Advanced आदि) आयोजित करना है. साथ ही परीक्षा प्रक्रिया को पारदर्शी, कुशल और निष्पक्ष बनाना भी है. पिछले कुछ वर्षों में, एनटीए (राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी) द्वारा आयोजित विभिन्न परीक्षाओं में अनियमितताओं और गड़बड़ियों की कई रिपोर्टें सामने आई हैं. लेकिन NEET UG 2024 के परीक्षा परिणामो के आने के बाद देश भर में बवंडर खड़ा हो गया है , इस परीक्षा में करीब 24 लाख छात्र छात्राओं ने हिस्सा लिया था , लेकिन पेपर लीक के साथ ही एनटीए की कार्य प्रणाली पर भी सवाल उठ रहे है ।

नीट परीक्षा 5 मई को आयोजित की गई थी जिसमे देश भर के करीब 24 लाख छात्र छात्राओं ने यह एग्जाम दिया था , जिसका परिणाम लोकसभा चुनाव नतीजे 2024 के दिन यानी 4 जून को घोषित किया गया . हालांकि इसकी निर्धारित तिथि पहले 14 जून थी, लेकिन नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने 10 दिन पहले ही नीट रिजल्ट जारी कर दिया. जिसमें पहली बार 67 स्टूडेंट को 720 में से 720 फुल मार्क्स आने पर कई सवाल खड़े हुए. मामले ने तूल पकड़ा तो एनटीए ने सफाई दी की 1563 छात्र ऐसे हैं जिन्हें लॉस ऑफ टाइम की वजह से ग्रेस मार्क्स दिए गए हैं. फिलहाल एनटीए ने ग्रेस मार्क्स रद्द करके 1563 छात्रों का री-नीट एग्जाम कराने का फैसला किया है लेकिन इस निर्णय बाकी छात्र संतुष्ट नही हुए और देशभर में परीक्षा निरस्त कर दोबारा कराए जाने की मांग चल रही है , आरोप है पेपर लीक हुआ । आरोप पर मोहर इसलिए भी लगती है क्योंकि इस मामले कई गिरफ्तारियां भी हो चुकी है , अगर इसमे पेपर लीक की बात में सत्यता पाई जाती है स्वभाविक है छात्र हितों को ध्यान रखते हुए नीट का पेपर दोबारा होने चाहिए ।

कथित NEET 2024 पेपर लीक के तार बिहार से जुड़ रहे हैं. दरअसल, राजधानी पटना के शास्त्री नगर थाने में एक FIR दर्ज किया गया था, जिसमें पेपर लीक के आरोप लगाए गए थे. पटना, पूर्णिया और कटिहार से कुल 24 लोगों को गिरफ्तार भी किया गया था. मामले की जांच आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की ओर से गठित SIT कर रही है. हालांकि, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने गुरुवार, 13 मई को नीट-यूजी 2024 के पेपर लीक होने के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि इन दावों की पुष्टि के लिए कोई सबूत नहीं है. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि सरकार सुनिश्चित कर रही है कि किसी भी छात्र का नुकसान नहीं हो.
देश के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के नीट पेपर लीक से इनकार के बीच एसआईटी और बिहार की ईओडब्ल्यू ने बड़ा खुलासा किया , पेपर लीक की जांच कर रही एसआईटी ने गिरफ्तार लोगों से पूछताछ के बाद यह दावा किया है कि नीट का पेपर लीक करने के लिए लाखों रुपये की लेनदेन हुई थी। कैंडिडेट्स ने पेपर लीक के लिए 30-30 लाख रुपये की रकम दी थी। साल्वर गैंग्स से जुड़ाव के आरोप में ईओडब्ल्यू ने 9 कैंडिडेट्स को पूछताछ के लिए तलब किया है। पेपर लीक और धांधली का मामला सुप्रीम कोर्ट में भी चल रहा है, जिसपर 8 जुलाई को सुनवाई होनी है.

इस परीक्षा में 67 बच्चों ने 100 प्रतिशत अंक हासिल किए। जिनमें से छह एक ही परीक्षा केंद्र के हैं। जबकि टॉप 70 में से आठ छात्र हरियाणा के झज्जर के एक परीक्षा केंद्र से हैं। साथ ही टॉप सौ बच्चों के रोल नंबर एक ही क्रम में हैं। 620 से 720 अंक पाने वाले छात्रों की संख्या पहले के मुकाबले 400 प्रतिशत तक बढ़ गई है जो पिछले साल मात्र प्रतिशत दशमलव चार से दशमलव छह प्रतिशत ही थी। वहीं पिछली बार टॉप 100 छात्रों की संख्या का प्रतिशत 2.5 ही था। जबकि 520 से 620 और उससे नीचे के वर्ग मे आने वाले छात्रों के प्रतिशत में कोई खास अंतर नहीं है। 1563 बच्चों को परीक्षा परिणामों में एनटीए द्वारा बिना किसी नियम के ग्रेस मार्क्स दिया गया। एनटीए इसके लिए दोषी है कि परीक्षा समाप्त होने के बाद बिना किसी नियम में बदलाव करते हुए ग्रेस मार्क्स दिए इसकी जांच की जाए।
कुल 720 अंक में से छात्रों द्वारा 718.719 अंक पाना गणितीय रूप से सम्भव नहीं है क्योंकि परीक्षा में सही जवाब के लिए चार और गलत जवाब के लिए एक नंबर काटने का प्रावधान है। ऐसे मे 180 प्रश्नों का उत्तर देने पर किसी भी स्थिति मे 718 या 719 अंक नहीं प्राप्त किया जा सकता।

नीट परीक्षा का पेपर लीक हुए क्योंकि एनटीए ने माना कि परीक्षा के दिन 4 बजकर 25 मिनट पर ही पेपर सर्कुलेट हुए जबकि परीक्षा 5: 20 पर समाप्त हुई। परीक्षा देने में मिले कम समय का हवाला देकर कंपेंसेटरी मार्क्स दिए गए। परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है क्योंकि ओएमआर शीट की कार्बन कॉपी छात्रों को नहीं दी गई। जिससे धांधली की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता। वहीं इस पूरे मामले में कई एफआईआर दर्ज की गई और कई लोगों को देशभर से गिरफ्तार किया गया।

नीट परीक्षा आयोजन करने वाला एजेंसी NTA लगातार सवालों के घेरे में है. मगर NTA का कहना है कि परीक्षा में कोई धांधली नही हुई है. केवल छह केंद्रों पर प्रश्नपत्र कुछ देर से बांटे जा सके. केवल 1600 अभ्यर्थियों की शिकायत है, उसका समाधान किया जा रहा है. सवाल यह है कि रजिस्ट्रेशन के लिए अचानक एक दिन का समय क्यों दिया है.

सवाल लगभग 24 लाख स्टूडेंट्स का है, जिनमें से बड़ी संख्या उन स्टूडेंट्स की है जो आने वाले समय में देश के बड़े हॉस्पिटल में मरीजों का इलाज करेंगे. अगर नीट पेपर लीक या गड़बड़ी की वजह से अयोग्य स्टूडेंट्स डॉक्टर बन जाते हैं तो उसका क्या-क्या और कितने बड़े पैमाने पर नुकसान होगा? पहली बार अंडरग्रेजुएट मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम यानी NEET की परीक्षा में 67 टॉपर्स घोषित करके नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने अपनी साख पर सवाल खड़े कर लिए हैं.

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